मूंगफली क्यों है मेवों से ज्यादा पोष्टिक – Peanuts Better Than Dry Fruit


मूंगफली Groundnut दुनिया भर में पैदा की जाती है। इसे सींगदाना Singdana भी कहते हैं। मूंगफली में पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं। इसमें जितना प्रोटीन होता है उतना बादाम या अखरोट जैसे मेवों में भी नहीं होता ।
इसे तेलगु भाषा में पल्लेलु , तमिल में कडलई , गुजराती में सींगदाना और मराठी में शेंगदाणे कहा जाता है। मूंगफली से तेल निकाला जाता है जिसे खाने में काम लिया जाता है। यह तेल खाना बनाने के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है। मूंगफली के तेल में जैतून के तेल जैसे ही गुण होते है। यह फली है लेकिन मेवों जैसे गुण होने के कारण यह नट कहलाती है।

मूंगफली के पोषक तत्व – Groundnut Nutrients

मूंगफली में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व होते है। इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन , विटामिन और खनिज होते है। मूंगफली जितना प्रोटीन मेवों जैसे बादाम , अखरोट आदि में भी नहीं होता। यह विटामिन बी 6 , विटामिन ई , नियासिन  , मेगनीज , कॉपर , जिंक , सोडियम , फोलेट , फास्फोरस , मैग्नेशियम , तथा फाइबर का बहुत अच्छा स्रोत होती है।
मूंगफली के गुण और फायदे मेवों से मिलते जुलते या उनसे अधिक होते है। अतः ये मेवों के फायदे लेने का एक सस्ता और सुलभ उपाय है। जिन्हें मेवे खाने से एलर्जी होती हो वे बेहिचक सींगदाना का उपयोग कर सकते है।
मूंगफली के तेल में  लगभग 46% मोनो अनसैचुरेटेड फैट ( MUFA ), 32 % पोली अनसैचुरेटेड फैट ( PUFA ) तथा 17 % सैचुरेटेड फैट होते है। PUFA तथा MUFA  की अधिक मात्रा के कारण यह तेल हृदय के लिए लाभदायक होता है।
जैतून के तेल में भी ये तत्व अधिक होते है। इसलिए जैतून का तेल फायदेमंद माना जाता है। अतः मूंगफली का तेल जैतून के तेल की टक्कर का तेल होता है। सब्जी बनाने , पराठा बनाने या पूरी तलने आदि के लिए भी मूंगफली का तेल श्रेष्ठ होता है क्योकि इसका स्मोकिंग पॉइंट अधिक ( 225°C  ) होता है।
तेल में पाए जाने वाले फैट किस प्रकार के हैं , इससे उसके फायदेमंद या नुकसानदेह  होने का पता चलता है।
मूंगफली को अच्छे से चबाकर खाना चाहिए तभी उसके पोषक तत्वों का सम्पूर्ण लाभ मिल पाता है। अन्यथा पाचन तंत्र द्वारा अवशोषित हुए बिना सभी पोषक तत्व बाहर निकल सकते है। अधिकतर एंटीऑक्सीडेंट दाने के गुलाबी छिलके में होते है। अतः मूंगफली इन्हें निकाले बिना खानी चाहिए।

मूंगफली कैसे खाएं – How to use peanuts

मूंगफली के उपयोग के कई तरीके हो सकते है। कुछ लोकप्रिय तरीके इस प्रकार है :
—  सर्दियों में मूंगफली की चिक्की गुड़ के साथ बना कर खाई जाती है । यह चक्की महिलाओं और बच्चों के लिए एक बहुत पोष्टिक और लाभदायक नाश्ता या स्नेक्स हो सकता है। इससे शरीर में गर्माहट बनी रहती है। गुड़ मूंगफली की चक्की बनाने की विधि के लिए यहाँ क्लिक करें
—  सर्दी के मौसम में छिलके सहित भुनी हुई मूंगफली छील कर खाने का आनंद सभी लेते है। इसके जैसा स्नैक्स शायद ही कोई और हो।
—  गुजरात में इसके दानों पर हल्का नमक चढ़ा कर खाया जाता है जिसे खारीसींग के नाम से जाना जाता है। गुजरात के भरूच की खारीसींग देश विदेश में बहुत लोकप्रिय है। अब ये सभी जगह आसानी से उपलब्ध है।
—  विदेशों में इसका बटर बहुत लोकप्रिय है। जिसे पीनट बटर कहते है। हमारे यहाँ भी इसका चलन बढ़ता जा रहा है। ब्रेड के साथ खाकर इसका फायदा लिया जा सकता है। यह पीनट बटर घर पर ही आसानी से बनाया जा सकता है।
—  मुंगफली के दाने अंकुरित करके खाये जा सकते है जो अत्यधिक पोष्टिक होते है। अंकुरित करने से इसमें मौजूद  विटामिन और खनिज की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है।
—  मुंगफली को धनिये आदि की चटनी के साथ पीस कर उपयोग में ले सकते है। इससे चटनी का स्वाद बढ़ जाता है।
—  भुनी हुई मुंगफली का चूर्ण सब्जी में डाला जा सकता है। इससे किसी भी सब्जी के स्वाद और पौष्टिकता में वृद्धि की जा सकती है। इसे अधिकतर मसाला भरकर बनाई जाने वाली सब्जियों में डाला जाता है। जैसे करेले , बैगन की भरवा सब्जी या सालन आदि।
—  मुंगफली पर बेसन व मसाला चढ़ा कर फिर तलकर टेस्टी दाने बनाये जाते है। ये नमकीन के शौक़ीन लोगों का पसंदीदा आइटम है।

मूंगफली के फायदे – Groundnut Benefits

मूंगफली

प्रोटीन

मूंगफली में पाया जाने वाला प्रोटीन प्लांट बेस्ड होता है। यह शरीर के लिए दूध या अंडे से मिलने वाले एनीमल प्रोटीन से अधिक लाभदायक होता है। ये प्रोटीन शरीर के सेल्स कोशिका के लिए आवश्यक होते है।
शरीर में सेल्स नियमित रूप से नए बनते रहते है तथा उनकी मरम्मत भी होती रहती है। यह काम प्रोटीन की मदद से ही संभव हो पाता है। अतः मूंगफली का उपयोग विशेष कर बच्चों को और जिन्हें प्रोटीन की कमी हो उनको अवश्य करना चाहिए।

ह्रदय ले लिए

मूंगफली में पाये जाने वाले मोनो अनसैचुरेटेड फैट ( MUFA ) तथा पोली अनसैचुरेटेड फैट ( PUFA)   ह्रदय के लिए बहुत हितकारी होते है। ये रक्त में लाभदायक कोलेस्ट्रॉल HDL को बढ़ाते है तथा हानिकारक कोलेस्ट्रॉल LDL को कम करते है।
इनके अलावा भी इसमें बहुत से ऐसे पोषक तत्व होते है जो ह्रदय के लिए फायदेमंद होते है जैसे मैग्नेशियम , विटामिन बी 3 , कॉपर , ओलेइक एसिड तथा कई एंटीऑक्सीडेंट आदि।
इसमें मिलने वाले अर्जीनाइन तथा एमिनो एसिड रक्त वाहिकाओं को लचीला बनाये रखने में मददगार होते है। इससे ब्लड प्रेशरबढ़ने की सम्भावना कम हो जाती है जो ह्रदय के लाभदायक है।

वजन सही रखने के लिए

मूंगफली में फैट की मात्रा अधिक होने के बावजूद यह वजन नहीं बढ़ाती। बल्कि वजन कम करने में मददगार होती है।मूंगफली खाने से पेट भरा हुआ महसूस होता रहता है तथा संतृप्ति का अहसास रहता है ।
भूख जल्दी नहीं लगती , इस कारण दूसरी चीजें खाने से बच जाते है। इस तरह वजन कम होता है। मूंगफली में  अघुलनशील फाइबर होते हैं । ये फाइबर वजन बढ़ने की संभावना को कम करते है।

डायबिटीज वालों के लिए

इसमें कार्बोहाइड्रेट की कम मात्रा तथा  प्रोटीन , फैट व फाइबर की अधिक मात्रा होने के कारण इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत कम होता है। जो यह दर्शाता है इसे खाने के बाद रक्त में कार्ब्स जल्दी से प्रवेश नहीं करते।
इस वजह से खून में शक्कर की मात्रा बहुत जल्दी नहीं बढ़ती। अतः डायबिटीज वालों के लिए इसका उपयोग नुकसानदेह नहीं होता है। चिकित्सक की सलाह लेकर इसका सेवन कर सकते है।

खून की कमी

मूंगफली में फोलेट की भरपूर मात्रा होती है। यह नए लाल रक्त कण बनने के लिए जरुरी होता है। लाल रक्त कण ही ऑक्सीजन को सभी अंगों तक पहुंचाते है । इसकी कमी होने पर एनीमिया यानि खून की कमी हो सकती है जो बहुत सी परेशानियों का कारण बन सकता है।
महिलाओं के लिए गर्भावस्था में फोलेट अतिआवश्यक होता है। इसकी कमी से महिला तथा गर्भ को हानि पहुँच सकती है। नियमित मूंगफली के सेवन से इस प्रकार की परेशानी से बचा जा सकता है।

पित्ताशय का पथरी

गुर्दे में पथरी बनने के अलावा पित्ताशय में भी पथरी बनने की संभावना होती है। पित्ताशय में पथरी बनने का मुख्य कारण कोलेस्ट्रॉल होता है। मूंगफली में कोलेस्ट्रॉल कम करने की प्रकृति होने के कारण यह पित्ताशय में पथरी बनने की संभावना को कम करती है।
रिसर्च द्वारा पाया गया है की मूंगफली का सेवन पुरुष या महिला सभी के लिए फायदेमंद साबित होता है । इस पर आगे रिसर्च जारी है।

फास्फोरस

मूंगफली में मौजूद फास्फोरस शरीर के सेल्स व टिशू बनने तथा इनकी मरम्मत के लिए सहायक होता है। यह कैल्शियम के साथ मिलकर हड्डियों और दांतों की मजबूती बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बच्चों के लिए मूंगफली खाना बहुत लाभदायक हो सकता है। इससे बच्चों के दांत ख़राब नहीं होंगे , दांत में कीड़ा नहीं लगेगा और हड्डीयां मजबूत बनेंगी , उन्हें अवश्य खिलाइये।
फास्फोरस शरीर में ऊर्जा उत्पादन के लिए भी जरुरी होता है। यह एसिड के असर को सन्तुलित करके रक्त का  pH सामान्य बनाये रखता है। हीमोग्लोबिन के लिए भी  फास्फोरस एक आवश्यक तत्व होता है। इस प्रकार मूंगफली के अनेक फायदे है।

मैग्नेशियम

मूंगफली में पाया जाने वाला मैग्नेशियम शरीर के लिए बहुत आवश्यक तत्व होता है। यह प्रोटीन के संश्लेषण , मांसपेशियों और तांत्रिक तंत्र के सुचारू रूप से कार्य करने , रक्त में शर्करा की मात्रा सन्तुलित रखने तथा ब्लड प्रेशर नियमित रखने में सहायक होता है।
मैग्नेशियम पूरे शरीर में कैल्शियम व पोटेशियम की आपूर्ति सुचारू बनाये रखता है। इससे ह्रदय की धड़कन नियमित रहती है।

मूंगफली से नुकसान

Groundnut se nuksan

विषैला अफ्लाटॉक्सिन

मूंगफली में कभी कभी एक विशेष प्रकार की फफूंदी पैदा हो जाती है जिसके कारण अफ्लाटोक्सिन नामक विषैला तत्व पैदा होता है। यह विषैला तत्व नमी के साथ अधिक तापमान के कारण पैदा होता है।
इस विषैले तत्व के कारण भूख में कमी तथा आँखों में पीलापन यानि लीवर में खराबी या पीलिया जैसे लक्षण पैदा होते है। इसका अधिक असर होने पर लीवर फेल होने या लीवर में कैंसर होने की संभावना रहती है।
मूंगफली को इस विषैले तत्व से आसानी से बचाया जा सकता है । सिर्फ फसल को नमी और अधिक तापमान से बचाते हुए सही तरीके से सुखाना होता है ।

पोषक तत्वों के अवशोषण में अवरोध

मूंगफली में कुछ मात्रा फाइटिक एसिड जैसे तत्वों की भी होती है जो पोषक तत्वों के अवशोषण में अवरोध पैदा करते है। फाइटिक एसिड सभी खाये जाने वाले बीज , नट्स , अनाज और फलियों में पाये जाते है। मूंगफली में इसकी मात्रा  2 -3 % होती है।
फाइटिक एसिड आयरन और ज़िंक का अवशोषण अवरुद्ध कर देता है। अतः अधिक मात्रा में मूंगफली का उपयोग ज़िंक तथा आयरन की कमी पैदा कर सकता है। हालाँकि सन्तुलित आहार लेने पर ऐसी कोई समस्या पैदा नहीं होती।

एलर्जी

मूंगफल से कुछ लोगों को एलर्जी हो सकती है। जिन्हें एलजी होती है उन्हें यह बहुत नुकसान पहुंचा सकती है। अतः ऐसे में मूंगफली तथा इससे बने सामान का उपयोग नहीं करना चाहिए।
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