बेल या बील के फायदे पेट के लिए – Beel ke fayde labh


बेल या बील Bel हमारी एक ऐसी धरोहर है जिसे ईश्वरीय माना जाता है। सावन में भगवान शिव की पूजा और व्रत के समय बेलपत्र अर्पित किया जाना ये प्रमाणित करता है कि ये कोई साधारण फल या पत्ते नहीं है।
बील बहुत पुराना पारम्परिक औषधीय पेड़ है । लगभग 4000 सालों से इसे उपयोग में लाया जा रहा है। आयुर्वेद ने दशमूल जड़ीबूटी में इसे शामिल किया है। दशमूल दस ऐसी आयुर्वेदिक दवाओं का मिश्रण है जिनकी मदद से कई प्रकार की लाभकारी आयुर्वेदिक दवा बनाई जाती है जो विभिन्न रोगों को ठीक करती है।
बील Beel का फल , पत्ते , छाल और जड़ सभी दवा के रूप मे काम आते है।
बीेल का पेड़

बेल के पोषक तव – Beel Nutrients

इसमें कैल्शियम , पोटेशियम ,आयरन , फास्फोरस , प्रोटीन और  विटामिन “A ” , विटामिन “C”  विटामिन “B” तथा कई ऑर्गनिक कंपाउंड व एंटीऑक्सीडेंट्स होते है। इसमें भरपूर मात्रा में फायबर होता है। इन्ही कारणों की वजह ये एक बहुत ही फायदेमंद फल है।
इसका बोटैनिकल नाम एगल मरमेलोस है और ये रुतेसिया फैमिली में का सदस्य है। इंग्लिश में इसे वुड एप्पल  Wood Apple  कहते है।
बेल का फल अनेक प्रकार के रोगों की दवा है। ये कब्ज , अपच , पेट के अल्सर , बवासीर , साँस की तकलीफ , डायरिया आदि से मुक्ति दिलाता है। वायरल और बेक्टेरियल इन्फेक्शन को रोकता है। । कैंसर जैसे रोग से बचाता है। इनके अलावा भी कई रोगों में काम आता है।
सफ़ेद दाग और टूटी हुई हड्डी जोड़ने के लिए भी बील दवा के रूप में काम आता है। ये अग्नाशय को ताकत देता है जिससे इन्सुलिन का स्तर सही बना रहता है और खून में शुगर कंट्रोल रहती है इस तरह डायबिटीज ठीक होती है। ये ब्लड प्रेशर भी कम करता है।

बेल के फायदे लाभ – Bael Ke Fayde , Benefits

पेचिश – Dysentery

बील पेचिश ठीक करने के लिए बहुत प्रभावकारी है। इससे पुरानी पेचिश तक ठीक हो सकती है।
—  सूखा बील का पाउडर और धनिया पाउडर आधा -आधा चम्मच और मिश्री एक चम्मच मिलाकर सुबह शाम पानी  के साथ लेने से पेचिश ठीक होती है। पेचिश के कारण दस्त के साथ खून आता हो तो वो भी बंद होता है।
—  सौंफ पाउडर – 3 चम्मच ,सूखा बील का पाउडर -3 चम्मच और सोंठ पाउडर दो चम्मच इन तीनो को एक गिलास पानी में उबाल लें। जब आधा रह जाये तब ठंडा होने पर छान लें। ये पानी सुबह शाम पीने से पेचिश ठीक हो जाती है।
—  बील का मुरब्बा प्रतिदिन खाने से पेचिश में आराम मिलता है। इसका गोंद भी दस्त में और पेचिश में लाभकारी होता है।

कब्ज – Constipation

ये आंतों को बलवान बनाता है।  बील कब्ज को ठीक करता है , इसके उपयोग से पेट साफ रहता है। फायबर की भरपूर मात्रा के कारण आतें साफ और स्वस्थ रहती है। कब्ज मिटाने के लिए शरबत इस प्रकार बनायें –
—  तीन चम्मच बील का गूदा और एक चम्मच इमली एक कप पानी में भिगो दें। दो घंटे बाद मसल कर छान लें। इसमें  स्वाद के अनुसार मिलाकर मिश्री मिलाकर पियें। पसंद के हिसाब से पानी की मात्रा थोड़ी बढ़ा सकते है। ये बील का शरबत नियमित पीने से कब्ज ठीक हो जाती है।
—  गर्मी के मौसम में बील बाजार में आसानी से मिल जाता है। इसका ऊपर का कड़क छिलका तोड़कर अंदर का गूदा चार चम्मच एक गिलास पानी में दो घंटे भिगो दें। मसल कर छान कर मिश्री मिलाकर पीएं। मिश्री की जगह काला नमक भी ले सकते है।

मधुमेह – diabitis

—  बीलपत्र  मधुमेह (डायबिटीज) रोग में बहुत लाभकारी है। 10 -12 बीलपत्र और 4 -5  कालीमिर्च पीस कर पानी में मिलाकर रोज पीने से  डायबिटीज रोग में आराम मिलता है। बील का जूस पीने से अग्नाशय ( Pancreas ) को शक्ति मिलती है और इन्सुलिन की मात्रा संतुलित रहकर डायबिटीज में फायदा मिलता है।

पेट का अल्सर – Peptik Ulcer

—  बील में विशेष फेनोलिक कम्पाउंड और एंटी ऑक्सीडेंट्स होते है जो  पेट के अल्सर को ठीक करते है।  पेट में लम्बे समय तक होने वाली एसिडिटी के कारण पेट की अंदरूनी त्वचा को नुकसान पहुंचता है। जिसकी वजह से अल्सर बन जाते है। बील एसिडिटी मिटाने के साथ अल्सर को भी ठीक करता है।
beel

सफ़ेद दाग – Vitiligo

—  त्वचा के ऊपर बनने वाले सफ़ेद धब्बे बील की मदद से ठीक हो सकते है। बील के गूदे में सोरलिन psoralen  नाम का तत्व होता है जो स्किन की धूप सहने की शक्ति बढ़ाता है। इसके अलावा बील में कैरोटीन भी होता है।
ये दोनों तत्व मिलकर स्किन का रंग एकसार बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते है। नियमित बील के उपयोग से सफ़ेद दाग हलके पड़कर त्वचा सामान्य हो जाती है।

दस्त और हैजा – diarrhoea  and cholera

—  बील में मौजूद टेनिन नामक तत्व में एंटी बैक्टीरियल गुण होते है। बैक्टीरिया के  कारण होने वाले दस्त में बील का ये गुण बहुत लाभदायक होता है। बारिश के मौसम की बीमारियों में दस्त और हैजा अधिक होते है जिसमे बील विशेष रूप से गुणकारी होता है।

बील के विटामिन ” C ” से लाभ

—  बील में प्रचुर मात्रा में विटामिन C  होता है। जो इम्युनिटी यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। विटामिन C के कारण ही ये स्कर्वी नामक रोग से भी बचाव करता है। शरीर में चुस्ती फुर्ती लाकर सुस्ती मिटाता है। विटामिन “C ” के कारण ही बील दांत मसूड़ों को भी स्वस्थ रखने में मदद करता है।

बवासीर – Piles

—  बवासीर Piles का मुख्य कारण कब्ज ही होता है। बील का टेनिन बवासीर को ठीक करता है। बील में आंतों की क्रियाशीलता बढाने का विशेष गुण होता है जिसकी वजह से अंदरूनी पाचन तंत्र को नुकसान पंहुचे बिना बाउल मूवमेंट आसान होता है।
जिसकी वजह से कब्ज ठीक होकर पाईल्स में आराम मिलता है। बील में  मौजूद दर्द और सूजन मिटाने वाले तत्व भी बवासीर ठीक करते है। इसके लेने से पाइल्स में बहुत आराम मिलता है। 

कोलेस्ट्रॉल – cholesterol

—  बील की पत्तियों में कोलेस्ट्रॉल कम करने का गुण होता है। बील की ताजा पत्तियों का रस पीने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है। सुबह खाली पेट एक चम्मच रस प्रतिदिन लेना चाहिए। रस निकालना भी सरल है।
पत्तियों को कूट पीस कर कपड़े में डालकर निचो कर रस निकाल लें। ये रस कुछ दिन लेने से जिन्हे कोलेस्ट्रॉल नहीं है उन्हें भी दिल की बीमारियों से सुरक्षा मिलती है।

लीवर – Liver

—  बील में बीटा कैरोटीन , थायमिन और रिबोफ्लेविन होने के कारण लीवर की समस्या से मुक्ति दिलाकर लीवर को शक्तिशाली बनाता है।

गुर्दे  – kidney

—  बील में शरीर के विषैले तत्व को बाहर निकालने की अद्भुत शक्ति होती है। बील का नियमित उपयोग करने से गुर्दों को शक्ति मिलती है। अतः किडनी की समस्या में बील का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। 
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